Friday, February 5, 2010

पंजाबी गीत: लायिया ते तोड़ निभावीं,

लायिया ते तोड़ निभावीं,
चन्न वे,
छड के न जान्वीं,
बीबा छड के न जांवीं...

माही सहुकारा वे,
कुड़ी मैं गरीबाँ दी,
तेरे हथ डोर,
चन्ना मेरिया,
मेरे नसीबाँ दी,
लायिया ते तोड़ निभावीं...
चन्न वे,
छड के न जान्वीं बीबा,
छड के न जांवीं...

किसे किसे वेले चन्ना मेरेया,
जाण मेरी दरदी वे,
सुनया ऐ लगी होई,
तोड़ नइयों छडदी,
चन्न वे,
लायियाँ ते तोड़ निभावीं,
छड के न जान्वीं,
बीबा छड के न जान्वीं

इस ताज महल उत्ते एहियो सोहे,
जिंदगी चलाई ए तेरे नाम लई,
हाँ तेरे नाम लई,
लायियाँ ते तोड़ निभावीं,
चन्न वे,
छड के न जान्वीं,
बीबा छड के न जांवीं...

पंजाबी गीत: ढोल चन वे,

 ढोल चन वे,
लखां तेरियां मन्निया,
तू इक मन वे,
ढोल मखणा,
दिल राजी रखना.
उची माड़ी ते दुध पई रिडकां,
मेनू सारे टब्बर दियां झिडकां,
मेनू तेरा इ दिलासा,
वे चन्न वे...
वे बाजार विकेंदी बर्फी,
मेनू ल्यादे दे निक्की जहि चरखी,
ते दुक्खा दियां पूनियां,
वे चन्न वे...
वे बाजार विके दुध कडया,
माह़ी कंजरी दे नालों फडया,
हाय एथों दिल सडया,
वे चन्न वे.

Thursday, February 4, 2010

पंजाबी लोकगीत. इक मेरी अख काशनी,:

इक मेरी अख काशनी,
दूजा रात दे उन्नींद्रे ने मारेया,
शीशे ते तरेड़  पै गयी, 
वाल वौंदी ने  धयान जदों मारेया,
के इक मेरी अख ....

इक मेरी सस्स चंदरी,
भैड़ी रोही दे बूटे नालों काली,
दिन रात रवे घूरदी, 
नाले दवे मेरे माँ-पयां नू गाली,
नी क़ेहडा उस  चंदरी दा,
असां  लचियां दा बाग उजाड़ेया,
के इक मेरी अख काशनी...

 के इक मेरा दियोर निकड़ा,
भैडा गौरियाँ रन्ना दा शौकी,
ढुक ढुक नेह्ड़े बैठदा,
रख सामणे रंगीली चौंकी,
नी इस्से गल तों डरदी ,
असां तीक वी न घुण्ड नूं उतारया,
के इक मेरी अख काशनी...

इक मेरा कंत ज़िम्वे, 
रात चानड़ी च दुध डा कटोरा,
रात दे सिन्दूरी रंग दा,
ओदे नैणा च शराबी डोरा,
नी इको गल माड़ी उसदी,
लाईलग नु है माँ ने बिगाडिया.

के इक मेरी अख काशनी,
दूजा रात दे उन्नींद्रे ने मारेया,
शीशे ते तरेड पै गयी,
वाल वौंदी नु धयान जदों मारेया.

Tuesday, February 2, 2010

राजस्थानी---गीत काहे को ब्याही बिदेस रे

 गीत काहे को ब्याही बिदेस रे
सुण बाबुल म्हारे,
भैया को दीना बाबुल महेला दुमेहला
म्हारे को  दियो  परदेस रे
सुण बाबुल म्हारे,
हम तो बाबुल थारे खूंटे की गैया,
जिधर बांधा बांध जाये रे,
सुण बाबुल म्हारे,'
जद म्हारो डोला महलों से निकला,
अम्मा ने खाई पछाड़ रे,
सुण बाबुल म्हारे,
जद म्हारो  डोला सडक पर आयो ,
भैया ने खाई पछाड़ रे,
सुण बाबुल म्हारे,
जद म्हारो डोलो बागां  मँ आयो,
कोयल बोल्यो तीखो बोल रे
सुण बाबुल म्हारो.

ए काली कोयल तू काहे बोल्यो,
हमको मिला परदेस रे,
सुण बाबुल म्हारो.

डोली रो पर्दों उठाके जग रोयो,
अब साजान जी रा देस रे,
सुण बाबुल म्हारो.

राजस्थानी गीत-- बन्नी पिछवाड़े रो आणा जाणा छोड़ दे,

बन्नी पिछवाड़े  रो
आणा  जाणा  छोड़ दे,

हाथ थारे  रेशम सरीखे
बन्नी मेंहंदी रो  लगाणा छोड़ दे,

पग थारे कमल् सरीखे,
बन्नी पायल रो
पहनना छोड़ दे,

बाल थारे रेशम सरीखे,
बन्नी वेणी रो
लगाणा छोड़ दे,

आँख थारी हिरणी सरीखी,
बन्नी काजल्ड रो
लगाणा छोड़ दे.

राजस्थानी गीत-- काच्ची कली न तोड़ रे बनडे ,

  काच्ची कली न तोड़ रे  बनडे  ,
डाली झुक आई.
हाँ रे डाली झुक आई,

शीश बन्ने के सेहरा सोहे,
लड़ियों पर नज़र हमारी,
रे बनडे डाली झुक आई,

अरे हाँ डाली झुक आई,
काच्ची कली न तोड़ रे बनडे ,

डाली झुक आई.

राजस्थानी लोक गीत---हाथी का हज़ार लागे,

हाथी का हज़ार  लागे, 
घोड़े का पचास लागे.
बाइसिकल का साठ 
जी   बन्ना,

दे दियो तार मंगा लिणी मोटर.
बैठ पडब वाको चाला
जी बन्ना.

हाथी का हज़ार लागे,
घोड़े का पचास लागे.